Tuesday, June 14, 2011

मेरे दर से ......

मेरे दर से हो कर तेरी बरात निकली
दिल पे आघात हुआ, आह निकली
गूँज रही थी शेह्नाइयां ढोल धाम धाम बज रहे थे
अरमान जो संजोये थे, वो चीख चीख रो रहे थे
झूठा तेरा प्यार था, झूठी हर बात निकली,
मेरे दर से हो कर तेरी .......

तन्हाइयां, वो चांदनी रातें, पहली मुलाक़ात की मीठी बातें
अरे सब ढोंग था तू दगाबाज़ निकली
मेरे दर से....
आज आ कर देखले वो हालत मेरी
वो जो मुझ पर मरा करते थे.
मेरी नाज़ुक सी चोट पर वो जो
सिसकियाँ भरा करते थे.
दिल के टुकड़े हो गए,
न आवाज़ निकली
मेरे दर से हो कर....
दिल पे आघात हुआ......
धन की ललक 
यश की अभिलाषा 
कभी न मिटे यह क्रूर पिपासा  

Saturday, November 20, 2010

जीवन

ग़म हुआ शाम जब तुझे जाते देखा,
बहुत खुशी हुई जब सुबह बन आते देखा

--नानक चंद

मैं और तू -

मैं शलभ हूँ, तू है बाती
रौशनी तेरी मुझे बहुत है भाती
निर्बल हूँ, पंख न जलाओ
मेरा प्यार न ठुकराओ

गीत

राग करुणा के मत गा तू ऐ कवि
गा गा कर बेसुरे ये राग
टूट गया तेरा वीणा तार
मुरझा गयी तेरी छवि
राग करुणा के मत गा तू ऐ कवि

जानता हूँ तेरा हिय है कोमल
थोड़े ही दुःख से हो जाता विकल
बिना खुशी - जीवन मरुस्थल
टूटे स्वरों की तू जोड़ लड़ी
राग करुणा के मत गा तू ऐ कवि

दुःख सुख तो जीवन में प्यारे
एक नदी के ज्यों दो किनारे
दोनों के मधुर मिलन से
बनती जीवन की कड़ी
राग करुणा के मत गा तू ऐ कवि
----नानक चंद

फूल तो हैं बहुत सारे

फूल तो हैं बहुत सारे
पर उन्हें तोड़ा करता नहीं
अपने भी है ढेर सारे
पर उन्हें छेड़ा करता नहीं

दूर से देखना उनको
अच्छा लगता है मुझको
पास जब भी गया किसी के
काँटों का भय लगा मुझको

मुझे न भूख धन दौलत की
स्वार्थ रहित मेरा प्यार
ममता के सौरभ से ओ फूलों
महकाओ मेरा नन्हा संसार

ममत्व का मैं भूखा
स्नेह की रही सदा चाह
मीठे बोल कोई बोल कर देखो
फिर देखो मेरा चहकना

-----नानक चंद