Saturday, November 20, 2010

फूल तो हैं बहुत सारे

फूल तो हैं बहुत सारे
पर उन्हें तोड़ा करता नहीं
अपने भी है ढेर सारे
पर उन्हें छेड़ा करता नहीं

दूर से देखना उनको
अच्छा लगता है मुझको
पास जब भी गया किसी के
काँटों का भय लगा मुझको

मुझे न भूख धन दौलत की
स्वार्थ रहित मेरा प्यार
ममता के सौरभ से ओ फूलों
महकाओ मेरा नन्हा संसार

ममत्व का मैं भूखा
स्नेह की रही सदा चाह
मीठे बोल कोई बोल कर देखो
फिर देखो मेरा चहकना

-----नानक चंद

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