फूल तो हैं बहुत सारे
पर उन्हें तोड़ा करता नहीं
अपने भी है ढेर सारे
पर उन्हें छेड़ा करता नहीं
दूर से देखना उनको
अच्छा लगता है मुझको
पास जब भी गया किसी के
काँटों का भय लगा मुझको
मुझे न भूख धन दौलत की
स्वार्थ रहित मेरा प्यार
ममता के सौरभ से ओ फूलों
महकाओ मेरा नन्हा संसार
ममत्व का मैं भूखा
स्नेह की रही सदा चाह
मीठे बोल कोई बोल कर देखो
फिर देखो मेरा चहकना
-----नानक चंद
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