Saturday, November 20, 2010

गीत

राग करुणा के मत गा तू ऐ कवि
गा गा कर बेसुरे ये राग
टूट गया तेरा वीणा तार
मुरझा गयी तेरी छवि
राग करुणा के मत गा तू ऐ कवि

जानता हूँ तेरा हिय है कोमल
थोड़े ही दुःख से हो जाता विकल
बिना खुशी - जीवन मरुस्थल
टूटे स्वरों की तू जोड़ लड़ी
राग करुणा के मत गा तू ऐ कवि

दुःख सुख तो जीवन में प्यारे
एक नदी के ज्यों दो किनारे
दोनों के मधुर मिलन से
बनती जीवन की कड़ी
राग करुणा के मत गा तू ऐ कवि
----नानक चंद

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