अल्फाज़
मेरे प्यारे नाना के
Saturday, November 20, 2010
मैं और तू -
मैं शलभ हूँ, तू है बाती
रौशनी तेरी मुझे बहुत है भाती
निर्बल हूँ, पंख न जलाओ
मेरा प्यार न ठुकराओ
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